Raat Ab Nahi Soti

a hand resting on a window glass

Raat ab nahi soti,
Din hai ki shuru nahi hota,
Kal ka intejaar kya karun ab,
Aaj hai ki khatm hi nahi hota,

Band hun aise pinjre mein,
Jisme salakhein nahi hain,
Ye char diwari jo ban gayi hai meri kaid,
Kehti hai isme meri hi bhalai hai,

Pehle aadat thi akelepan ki,
Shauk hua karta tha khud ko akela kehna,
Aaj tanhayi mili hai arse baad muraad mein,
Toh majburi hi ho gaya akela rehna,

Ajeeb si khamoshi pasri padi hai sadkon par,
Par dil mein kohraam macha hai,
Subah se shaam beet gayi auron ko tasalli dete dete,
Par andar khud ko khud ka hi nahi pata hai,

Shikayat thi logon ki pehle,
Khud ke liye waqt hi nahi hai,
Aaj waqt ki balti jo chhalki,
Logon ke paas karne ko kuch hi nahi hai,

Insaan band hain kamron mein,
Kudrat ko shayad thodi saans mili hai,
Fursat nahi thi jin rishton ko pehle kabhi,
Unko bhi ab chhuti mili hai,

Sona chahti hain palkein,
Par raat ab nahi soti,
Subah toh hogi jarur,
Par din hai ki shuru nahi hota,
Kal ka intezaar kya karun ab,
Mera aaj hi khatm nahi hota…
-N2S
26032020

ओहदे (Auhade)

mountains and green forest
ओहदों की नुमाईश करने वाले,
खुद चले गए, ओहदे रह गए,
अंजाम हुए सबके एक से,
कुछ दफ़न हुए तो कुछ राख बनकर धुआँ हो गए,
क्या गुमान करूँ चीज़ें समेटने का?
ये शोहरत के सामान किसके अपने हुए,
शायद इश्क़ की सीढ़ी ही पहुँचाये मुझे मेरी मंज़िल,
के फकीरों को ही जन्नत नसीब हुए,
पर मुझे तो जन्नत की भी चाहत नहीं,
उड़ान भरकर जो सफर ख़त्म करूँ मैं,
मुझे मेरे पहाड़ों की मिट्टी मिले…
-N2S
06052017

कल का इंतज़ार

Man looking at river
उम्र के इस मोड़ पे बचपन सी नादानगी की छूट नहीं मिलती,
और न ही बूढ़ों की तरह वरिष्ठ नागरिकता का कोटा,
हर नज़र तुम्हे नापति है, तोलती है,
और लाख भला करना चाहो,
अपनी ज़रा सी असहजता का गुन्हेगार तुम्हे ही ठहराती है,
रिश्तेदारी सिर्फ लेन-देन बनकर रह गयी है और यारी तारीखों की मोहताज़,
झूठ जरुरी हो गया है और जी-हज़ूरी आदत,

शिकार भी सब है यहाँ और सभी ही हैं शिकारी,
ज़िन्दगी सांसें गिनती की ही देती है,
उसकी नहीं होती हैसियतों से कोई देनदारी,
न जाने किस कल के लिए बचा रखी है फुर्सत हर एक ने,
आज में घिस-घिसकर जीते हैं, सिर्फ एक भुलावे के लिए,
घडी तो एक वही रख़ी है बरसों से,
बस बैटरी-फीते बारी बारी बदल दिए जाते हैं,
इस कल के इंतज़ार में हम न जाने कितने आज जलाये जाते हैं…
-N2S
08012018

बस खिलौने कम हैं (Bas Khilaune Kam Hain)

closeup photo of white petaled flower showing beauty of life

अब अश्क सवाल नहीं पूछते,
वजह ढूंढते हैं बह जाने को,
हम बुद्धू हैं कि ,
यह समझ नहीं पाते,
मतलबी लोग नहीं, बस आलसी हैं,
साँसों की गिनती तो पहले जितनी ही है,
अब बस खिलौने कम हैं पाने को,



कल का हस्र देख, आज थोड़ा और जी लूँ ,
की कल से कम ही तुलेंगी खुशियां
ज़िन्दगी के तराज़ू पर,
हर दिन गुज़र जाता है सिकवे करते-करते,
हर शाम एक और वजह मिल जाती है खो जाने को,
वक़्त लाया तो है तरीके बहुत बातें कहने के लिए,
बस अलफ़ाज़ कम रह गए हैं सुनाने को,
आज भी इसी आस में सो जाते हैं,
की कल कोई उठाएगा,
स्कूल जाने को…
-N2S
02012019

Rented Room

a filled dark room with a poster and a quote written on it
While changing address, I looked at my old room for the last time,
I didn’t remember exactly when I came here and made it mine,
This room saw me grow,
It witnessed my high and low,
I had spread my world in this few hundred square feet place,
I cleaned it, maintained it, decorated it in refined taste,

It saw me and friends bursting in laughter,
It also looked at me when I was lonely and no one was there,
These walls heard my wishpers;
my late night conversations with the girl I loved,
Then it also stood silently
when my heart was broken and battered,



This was a rented address but it was my home,
It wouldn’t remember me, it would belong to someone else once I am gone,
As I stepped into the cab for my new address,
A thought came to me, which should be said,
Life is nothing but a rented room, you can’t have it forever,
So don’t get too attached to it, in the end, nothing matters…
-N2S
13072015